Sunday, September 19, 2010


News Update Almora (Cloud burst)
उत्तराखंड में बारिश ने सारे रिकॉर्ड तोड़े, 40 की मौत

पहाड़ी राज्य उत्तराखंड में कहर बरपा रहे मॉनसून ने रविवार को अतिवृष्टि का पिछला 44 साल का रिकॉर्ड भी तोड़ दिया।
भारी बारिश से नदियों में उफान आने के बाद हरिद्वार में गंगा का जलस्तर खतरे के निशान से 2 मीटर से भी अधिक बढ़ जाने के बाद पटना और गंगासागर तक के इलाकों में चेतावनी जारी कर दी गई है। राज्य में 24 घंटे के अंदर बारिशों से जुड़ी घटनाओं में मृतकों की संख्या 40 पार कर चुकी है।
राज्य मौसम केंद्र के निदेशक आनंद शर्मा के अनुसार इस साल के मॉनसून ने अतिवृष्टि के मामले में रविवार को 1966 का रिकॉर्ड तोड़ दिया है। देहरादून में वर्ष 1966 में मॉनसून के दौरान 2930 मिमी वर्षा रिकॉर्ड की गई थी और रविवार की सुबह बारिश देहरादून में 2970 मिमी का आंकड़ा भी पार करने जा रही है। प्रदेश के 13 में से 10 जिलों में अतिवृष्टि हो रही है।


सबसे ज्यादा तबाही अल्मोड़ा जिले में हुई है। अल्मोड़ा के देवली गांव में 18 लोगों के मारे जाने की खबर है। जबकि 35 लोगों के लापता हो गए। यहां बादल फटने के कारण कोसी नदी ने कहर बरपा रखा है।

इसके अतिरिक्त दर्जनों लोग घायल हो गए हैं और बड़ी संख्या में लोग बेघर हो गए हैं। मेजर जुगरान के अनुसार अल्मोड़ा जिले में सबसे अधिक तबाही हुई है और वहां सेना सिविल प्रशासन की मदद कर रही है। वायु सेना से भी मदद मांगी गई है।

अधिकांश सड़कों के क्षतिग्रस्त हो जाने से प्रदेश में ज्यादातर गांवों और कस्बों का एक-दूसरे से संपर्क कट गया है, जिससे आवश्यक वस्तुओं की भारी किल्लत हो गई है। राज्य मुख्यालय पर प्राप्त जानकारी के अनुसार अधिकांश सड़कें टूट जाने के कारण बचाव और राहत दलों का प्रभावित क्षेत्रों तक पहुंचना बहुत कठिन हो गया है।



कोसी नदी के किनारे बसे कई गांवों में बादल फटने की वजह से 60 से ज्यादा मकान ध्वस्त हो गए। जिले के बाड़ी गांव में कई मकान ढह गए। यहां 10 लोगों के लापता होने की खबर है। आपदा प्रबंधन विभाग के मुताबिक अलमोड़ा,कौसानी और उत्तरकाशी का संपर्क कट गया है और राज्य के सभी राजमार्ग बंद हैं और पर्वतीय इलाकों में संचार तंत्र ठप्प हो गया है। अधिकारियों को आशंका है कि धन-जन की और क्षति हुई होगी और इसका पता तब चल पाएगा जब रास्ते खुलेंगे और सुदूर गांवों से संपर्क हो पाएगा। सरकार की ओर से राहत और बचाव कार्य तो जारी हैं लेकिन इस भीषण तबाही के सामने इंतजाम नाकाफी है और आपदा प्रबंधन विभाग बेबस और लाचार नजर रहा है। मौसम विभाग के अनुसार अभी और बारिश के आसार हैं।
Source : Different News Paper


7 comments:

  1. कुदरत के आगे किसी का जोर नहीं|

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  2. प्रकृति से बहुत ज्यादा छेड़-छाड़ के नतीजे तो आयेंगे ही. घटना चाहे पिथोरागढ़ के ला झाकेला की हो या बागेश्वर के सुमगढ़ या अब अलमोरा और नैनीताल की. नुकसान तो मासूमो का ही हुआ है. इस बारिश ने तो मानो सारे रिकॉर्ड तोड़ने की ही ठान रखी है.

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  3. प्राकृतिक आपदा के आगे किसी का जोर नहीं चलता

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    मालीगांव
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  5. इस सुंदर से चिट्ठे के साथ हिंदी ब्‍लॉग जगत में आपका स्‍वागत है .. नियमित लेखन के लिए शुभकामनाएं !!

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  6. हिंदी ब्‍लॉग जगत में आपका स्‍वागत है ..

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